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AIR unaware of price hikes

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NK SINGH BHOPAL: The All India Radio authorities at Bhopal seem to be unaware of the sky-rocketing prices. To the utter dismay of the listeners, for the past few months, the prices of wheat have not been included in the food-grain price list daily broadcast by the Bhopal station of AIR. Though the Department of Economics and Statistics of the State Government supplies the wheat prices along with the prices of other commodities daily to the AIR, the latter find it more convenient to ignore them. The reason for this shut-your-eyes step is said to be the too-honest data' provided by the department. According to the figures available with the department, the prices of wheat in the 'open market' vary from Rs. 1.50 to Rs. 1.60 per kg. According to the rates fixed by the State Government -- which now controls the wheat trade right at the very beginning of the production pipe line -- it should not have crossed the Rs. 1 mark. Faced with this peculiar situation the AIR authorities w...

विन्ध्य में राजनीतिक गोत्र बदलते रहते हैं, नहीं बदलती है तो बदहाली

Dainik Bhaskar 13 November 2018



A political pilgrimage from Communist Party to BJP

NK SINGH


रीवा: देवतालाब के भाजपा विधायक गिरीश गौतम हर साल जाड़ों में अपने विधान सभा क्षेत्र का साइकिल से दौरा करते हैं. महीने भर एक पंचायत से दूसरी पंचायत साइकिल से जाते हैं. रात को गाँव में ही सो जाते हैं. उनके साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं का हुजूम अगले पड़ाव तक उन्हें छोड़ने जाता है.

जनता से जुड़ने की इस हुनर की वजह से वे २००३ में विन्ध्य के दिग्गज कांग्रेसी नेता श्रीनिवास तिवारी को परास्त कर चुके हैं. भाजपा में इस तरह काम करने वाले लोग थोड़े कम ही दीखते हैं.

गौतम  लम्बे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी के कार्ड होल्डर थे. लाल झंडा थामे हुए वे एक दफा चुनाव कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर भी लड़ चुके है.

देवतालाब से ही कांग्रेस ने विद्यावती पटेल को खड़ा किया है, जो पहले बसपा के टिकट पर चुनाव लडती और जीतती रही हैं. इलाके में कोई भी उन्हें कांग्रेसी नेता के रूप में नहीं जानता. लगातार उन्हें बसपा नेता के रोल में देखने वाले वोटर कंफ्यूज हैं.

विन्ध्य के नेताओं को देखने से ऐसा कोलाज़ बनता है जिसमें सारे चेहरे गड्ड-मड्ड हो जाते हैं. इस दफा भी मैदान में कम उम्मीदवार हैं, जिन्हें आप खांटी कांग्रेसी या खांटी भाजपाई कह सकते हैं. यहाँ सारी पार्टियों के दरवाजे एक-दूसरे के लिए खुले रहते हैं.

“आवक-जावक तो चलत रहत है,” बिरसिंहपुर में सड़क किनारे खाने-पीने की एक दूकान चलने वाले सज्जन कहते हैं. इस आने जाने का कोई बुरा भी नहीं मानता. ढेरों उम्मीदवारों के राजनीतिक गोत्र कुछ और है और मुखौटा कुछ और.

गिरीश गौतम के अलावा भी भाजपा के कई नेता दूसरी पार्टियों से आये हैं, खासकर कांग्रेस से. इनमें मंत्री राजेन्द्र शुक्ल और नागेन्द्र सिंह गुढ़ जैसे कद्दावर नेता भी शामिल हैं, लम्बे समय तक कांग्रेस में थे. शुक्ल इस बार रीवा से चुनाव लड़ रहे हैं तो सिंह गुढ़ से.

मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी समाजवादी दल होते हुए कांग्रेस के रास्ते भाजपा में आये. मऊगंज के उम्मीदवार प्रदीप पटेल, चुरहट के शारदेंदु तिवारी, सीधी के केदारनाथ शुक्ला और अमरपाटन के रामखिलावन पटेल लम्बे समय तक बसपा में रह चुके हैं.

“देखने में ऐसा लगता है मानों भाजपा ने अपने सारे बड़े नेता दूसरी पार्टियों से लिए हों,” विन्ध्य की राजनीति को अच्छी तरह समझनेवाले जयराम शुक्ल कहते हैं.

कांग्रेस ने इस दफा विद्यावती पटेल के अलावा और भी कई उम्मीदवार दूसरी पार्टियों से इम्पोर्ट किये हैं, जिनमें भाजपा के अभय मिश्रा और बसपा की बबिता पटेल शामिल हैं.

मऊगंज के सवर्ण समाज पार्टी के लक्ष्मण तिवारी की राजनीतिक यात्रा काफी घुमावदार रही है – सवर्ण समाज पार्टी से भारतीय जनशक्ति, फिर भाजपा और अब सवर्ण समाज में वापस.

बड़े निरपेक्ष भाव से होने वाले इस आवक-जावक की एक वजह विन्ध्य की राजनीति पर सोशलिस्टों का पारंपरिक प्रभाव रहा है. अर्जुन सिंह से लेकर श्रीनिवास तिवारी तक कांग्रेस के सारे बड़े नेता सोशलिस्ट पार्टी से ही आये थे. सोशलिस्ट बैकग्राउंड के काफी नेता जनता पार्टी के विभाजन के बाद १९७७ के बाद भाजपा में चले गए थे.

नेताओं की आवक-जावक से दूर पूर इलाका बदहाल है. हाईवे से उतर कर जैसे ही अंदरूनी इलाकों में घुसें तो सड़कें लगभग गायब मिलती हैं. चित्रकूट से मझगवां होते हुए बीरसिंहपुर की सड़क इस कदर टूटी है कि लगता है दशकों से उसकी मरम्मत नहीं हुई है. लोग बिजली नहीं मिलने की शिकायत करते भी मिले. यह ऐसे मुद्दे हैं, जिनकों लेकर जनता के अन्दर गुस्सा पल रहा है.

Dainik Bhaskar 13 November 2018
Dainik Bhaskar 13 November 2018


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